आपका नज़रिया
- Rekha Khatwani

- Apr 20, 2020
- 3 min read
क्या आप जानते हैं आपकी ज़िन्दगी की बनावट आपके नज़रियों पर निर्भर करती है|
अब ऐसा है कि कुछ नज़रिये सही भी होते है, कुछ गलत भी होते हैं, कुछ बंदिशों का निर्माण करने वाले भी होते हैं, कुछ अच्छे भी होते हैं, कुछ फायदेमंद भी होते हैं| कहने का तात्पर्य ये कि ज़िन्दगी में आपके सामने क्या आएगा, ये आपके नज़रियों पर निर्भर करेगा|
अब आप कहेंगे तो ठीक है दिक्कत क्या है| तो मैं कहूँगी वैसे तो दिक्कत कुछ नहीं लेकिन कभी कभी दिक्कत होती है जब कुछ चीज़े हम बदलना चाहते हैं और बदल नहीं पाते या फिर ज़िन्दगी में कुछ चीज़ें वैसी नहीं होती हैं जैसे हम चाहते हैं | और मैं कहूँगी तब ये चीज़ /टूल जो एक्सेस कांशसनेस के बहुत सारे जादुई टूल्स में से एक है- ‘दिलचस्प नज़रिया™’, जो आपकी मदद करता है आपके नज़रियों को बदलने में |
अब ये क्या चीज़ है? तो उदहारण के तौर पर अगर आपका कोई नज़रिया है जो आप बदलना चाहते हैं क्योंकि उससे जो आपकी ज़िन्दगी में प्रकट हो रहा है आपको पसंद नहीं आ रहा, तो आप देखें कि आपका क्या नजरिया है जो उस नापसंद चीज़ को आपकी ज़िन्दगी में निर्मित कर रहा है और फिर उस नज़रिये को ध्यान में रखकर ये कहें ‘दिलचस्प नजरिया ये मेरा नजरिया’| कुछ १०-१५ बार इसे बोलें फिर देखें आपको कैसा महसूस हो रहा है|
अगर आपको हल्का महसूस हो रहा मतलब यह टूल काम कर रहा है | और बेहतरीन बात ये है कि ये टूल हमेशा काम करता है |
चलिए इसे अभी करके देखते हैं| तो एक आम नज़रिया जो हर किसी का होता ही है कि ‘पैसा कमाना मुश्किल होता है’- इसे लेते है| और अब इसे ध्यान में रख कर १०-२० बार कहें ‘दिलचस्प नजरिया मेरा ये नज़रिया’| आप इसे तब तक कर सकतें जब तक आप इस नज़रिए से मुक्त नहीं हो जाते|
क्या हो अगर आपके पास सिर्फ वही नज़रिये हों जो आपकी ज़िन्दगी को विशाल बनाएं और संभावनाओ को निमंत्रण दें?
आज आप कितने नज़रियों से मुक्ति पा सकते हैं| लगभग सारे नज़रिये एक जेल की तरह है जो आपको सुकून की सांस नहीं लेने देते और उनमें से कुछ इस प्रकार हैं –
मैं सुन्दर नहीं हूँ
मेरे पास पैसे नहीं है
मैं .......... चीज़ में परफेक्ट नहीं
ज़िन्दगी मुश्किलों से भरी है
ज़िन्दगी में उतार चढ़ाव तो आते हैं
एक उम्र के बाद आपका शरीर कमज़ोर होने लगता है
रिश्तों में समझौता करना पड़ता है
मैं बहुत मोटा हूँ
मेरे व्यापार में दिक्कते हैं
मैं काम नहीं करूँगा तो रोड में आ जाऊंगा
हर कोई मतलबी है
मंदी का दौर चल रहा है
सारी मुश्किलों की जड़ पैसे हैं
इस इंसान/परिस्थिति के कारण मैं आज इस हालत में हूँ
मैं एक बहु हूँ तो अब मैं मैं ये नहीं कर सकती
मेरी उम्र .... हो चुकी है मैं ये नहीं कर सकती
वगैरह...
आप कहेंगे ये तो सब सही है या ऐसा होता ही है या इनमें से कुछ तो १००% सही है| तो मैं कहूँगी- मैंने नहीं कहा कि आप गलत हैं| क्योंकि मैं ये मानती हूँ कि अगर मैंने आपको गलत कहा या अगर आप मुझे गलत लग रहे हैं तो ये सिर्फ मेरा नज़रिया है इसका मतलब ये नहीं कि आप गलत हैं|
लगभग हर नज़रिया आपके लिए एक सीमा को तयार कर देता है जिसके आगे आप नहीं जा सकते| हम ऐसे ही खुद के लिए सीमाओं का निर्माण करते हैं | और ऊपर दिया हुआ टूल उन सीमाओं को मिटा देता है|
मैं आपको आमंत्रित करती हूँ इसे एक अलग ढंग से देखने के लिए| और वो ये कि जैसे मैंने शुरू में कहा कि आपकी ज़िन्दगी में जो हो रहा है वो आपके नज़रियों का खेल है| तो क्या हो अगर आप उन्हें बदलना शुरू करें ताकि आपकी ज़िन्दगी या जो कुछ भी बदलना चाहते हैं वो बदले|
और अगर आप ऊपर दिए टूल को इस्तेमाल करके कुछ बदलाव महसूस कर रहे हैं तो आप सोच रहे होंगे अब आगे क्या? तो फिर आप इस सवाल में रह सकते हैं-
“अब और क्या संभव है?”™
अगर आप इन टूल्स के बारे में और जाना चाहते हैं तो आप यहाँ जा सकते हैं- www.accessconsciousness.com और आप इनकी क्लासेज भी अटेंड कर सकते हैं जिनमें आपको ऐसे ही जादुई टूल्स और प्रक्रियाओं से परिचित कराया जाता है|
शुक्रिया! इसे पढ़ने के लिए और कुछ नए की खोज में रहने के लिए जो आपको वाकई अन्दर से आज़ाद महसूस कराए! सच में –
अब और क्या संभव है?
- रेखा खटवानी

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